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अवारन ज़ोनकार्यक्रम

डॉ. मनान बलोच ने कठिन परिस्थितियों में बीएनएम को सशक्त किया — बीएनएम आवारान ज़ोन की बैठक

BNM Mashkai
Last updated: February 5, 2026 12:23 am
Last updated: February 5, 2026
4 Min Read
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बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) की ओर से शहीद डॉ. मनान और उनके साथियों की शहादत की बरसी के अवसर पर एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में बीएनएम आवारान ज़ोन के सदस्यों ने भाग लिया। बैठक को बीएनएम के जूनियर उपाध्यक्ष उस्ताद बाबुल लतीफ़, केंद्रीय समिति के सदस्य चीफ़ असलम, आवारान ज़ोन के उपाध्यक्ष तलार नाज़ और ज़ुबैर ने संबोधित किया।

उल्लेखनीय है कि 31 जनवरी 2016 को मस्तूंग के क्षेत्र किली दातो में पाकिस्तानी सेना ने एक हमला किया, जिसमें डॉ. मनान को उनके साथियों बाबू नौरोज़, हनीफ़, अशरफ़ और साजिद सहित शहीद कर दिया गया। शहीद डॉ. मनान बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के महासचिव थे।

अपने संबोधनों में वक्ताओं ने कहा कि शहीद डॉ. मनान केवल एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चिकित्सक भी थे। वे बलोचिस्तान के हर कोने से भली-भांति परिचित थे। अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उन्होंने संगठन को मज़बूत करने के लिए दिन-रात अथक प्रयास किए। पार्टी के कार्य हेतु जहाँ भी उन्हें बुलाया गया, वे बिना किसी हिचक के वहाँ पहुँचे।

शहीद डॉ. मनान की राजनीतिक चेतना और क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे अपने साथियों के कार्यों की हमेशा आलोचनात्मक दृष्टि से समीक्षा करते थे। यदि किसी कमी की पहचान करते, तो उसे स्पष्ट और बेबाक शब्दों में सामने रखते थे। उनके अनुसार, राजनीति में संतुलन बनाए रखने के लिए आलोचना आवश्यक है, और वे आलोचना को कभी भी द्वेष या नफ़रत नहीं मानते थे। उनका उद्देश्य यह था कि कमज़ोरियाँ संगठन और आंदोलन को प्रभावित न करें।

वक्ताओं ने कहा:
“शहीद डॉ. मनान की शहादत से एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ, लेकिन उनकी कुर्बानियों ने संगठन को और अधिक मज़बूत व सशक्त बना दिया है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सबसे बड़ी ताक़त प्रसिद्धि नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य के प्रति निष्ठा होती है।”

वक्ताओं ने आगे कहा कि डॉ. मनान का अध्ययन और पुस्तकों से गहरा लगाव था। वे अपने साथियों को निरंतर पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते और कहते थे कि पुस्तकों से मित्रता करें, क्योंकि पुस्तकें प्रगति की गारंटी होती हैं। वे स्वयं नियमित रूप से अध्ययन करते थे और सदैव राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते थे। वे समाचार सुनते, नोट्स तैयार करते और बलोचिस्तान, क्षेत्र तथा विश्व की परिस्थितियों से स्वयं को अवगत रखते थे।

वक्ताओं ने कहा कि औपचारिक पद संभालने से पहले भी डॉ. मनान एक नेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वे बलोच राष्ट्र की एक सशक्त और प्रभावशाली आवाज़ थे। बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मंच के माध्यम से उन्होंने बलोच राष्ट्र को एकजुट किया और ज्ञान, विचार तथा चेतना को प्रोत्साहित किया, ताकि पाकिस्तान के दमन और अधीनता के विरुद्ध प्रतिरोध को मज़बूत किया जा सके। पाकिस्तानी राज्य ने उनकी राजनीतिक गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से उन्हें निशाना बनाया।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि पाकिस्तानी राज्य यह मानता है कि राष्ट्रीय नेताओं की शहादत से बलोच आंदोलन रुक जाएगा या समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं होगा। शहीदों की कुर्बानियों के परिणामस्वरूप बलोच राष्ट्र की आने वाली पीढ़ियाँ और अधिक जागरूक व सचेत होंगी, और एक दिन वे अवश्य अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करेंगी।

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