बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना निहत्थे लोगों को निशाना बना रही है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की खामोशी ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को हर पहलू से गंभीर बना दिया है। केवल इसी सप्ताह 17 लोगों की न्यायेतर हत्या कर दी गई। बलूचिस्तान के मस्तूंग, नोशके, ज़हरी, खुज़दार, केच और ग्वादर जिलों के उपनगरीय इलाकों में प्रतिदिन के आधार पर जबरन गुमशुदगी का सिलसिला जारी है और नागरिक आबादी पर गनशिप हेलीकॉप्टरों से गोलाबारी की जा रही है। बीएनएम इस राजकीय आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है। पाकिस्तान बलूच राष्ट्र का नरसंहार कर रहा है और अब वैश्विक हस्तक्षेप अपरिहार्य हो गया है। इन विचारों को बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के केंद्रीय प्रवक्ता ने बलूचिस्तान में हाल के दिनों में हुए राजकीय आतंकवाद की विभिन्न घटनाओं के संदर्भ में अपने एक बयान में व्यक्त किया।
प्रवक्ता ने विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि कब्जे वाला बलूचिस्तान पाकिस्तानी सेना के लगातार अत्याचारों और राजकीय आतंकवाद का शिकार है। 2 जून 2026, मंगलवार को पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर ज़हरी क्षेत्र को निशाना बनाया। इस हमले में ज़हरी के बुलबुल इलाके में सेना ने एक शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ता खलील अहमद मुसियानी के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी और घायल अवस्था में गिरफ्तार कर लिया। बाद में हिरासत के दौरान उनकी हत्या कर दी गई, जबकि कई अन्य लोगों को जबरन लापता कर दिया गया है। लापता होने वालों में ज़हरी खान मुसियानी, शकर खान, सनाउल्लाह मुसियानी, उम्मीद अली खान, दोस्त मुहम्मद, इरशाद अहमद और अन्य शामिल हैं, जिन्हें अभी तक रिहा नहीं किया गया है।
उन्होंने आगे की घटनाओं का विवरण देते हुए कहा कि 31 मई को मस्तूंग के कुर्दगाप में पाकिस्तानी सेना ने गोलाबारी कर गुलाम जान समलानी की हत्या कर दी, जो पेशे से एक ड्राइवर थे। 1 जून को कड कोचा के कड उमरानी इलाके में नागरिक आबादी पर हेलीकॉप्टरों से गोलाबारी की गई, जहां संचार संपर्क टूट जाने के कारण नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी तक सामने नहीं आ सकी है।
बीएनएम के प्रवक्ता ने कहा कि कब्जे वाला बलूचिस्तान 1948 में कब्जे के पहले दिन से लेकर आज तक लगातार पाकिस्तानी सेना की आक्रामक कार्रवाइयों की चपेट में है। यहाँ राजनीतिक ताकतों को हिंसा और बल प्रयोग के जरिए कुचलने की राजकीय नीति पूरी तीव्रता के साथ जारी है। जबरन गुमशुदगी के सिलसिले ने हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से तबाह कर दिया है। 31 मई से लेकर 2 जून तक, केवल तीन दिनों में पाकिस्तानी सेना ने 17 लोगों की खुलेआम हत्या कर दी, लेकिन सेना मारे गए लोगों का विवरण देने से बच रही है। इस तरह की घटनाओं में अक्सर जबरन लापता किए गए लोगों को हिरासत में मार दिया जाता है और पाकिस्तानी सेना इसे ‘सशस्त्र गुटों के खिलाफ कार्रवाई’ का नाम देकर झूठे दावे करती है। मृतकों के शव भी उनके परिजनों को नहीं सौंपे जा रहे हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी सेना बलूच राष्ट्र के नरसंहार की नीति पर काम कर रही है। यह एक ऐसी क्रमिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी राष्ट्र को राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से नष्ट किया जाता है। डेरा बुगती, कोहलू, अवारान, ज़हरी, खुज़दार, पंजगुर, केच और ग्वादर जिलों में दर्जनों गांवों को तबाह करके लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया। इसी नीति के तहत हाल के दिनों में ग्वादर की जीमड़ी तहसील के गाँव ‘पानवान’ को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के जवान रात के अंधेरे में पानवान में लोगों के घरों पर हमला करते हैं। जबरन गुमशुदगी, घरों को ध्वस्त करने और न्यायेतर हत्याओं की घटनाओं से तंग आकर सैकड़ों लोगों वाले दर्जनों परिवार पलायन कर पश्चिमी बलूचिस्तान चले गए हैं, जहां वे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और दर्जनों बच्चे शिक्षा से वंचित हो चुके हैं।
प्रवक्ता ने अंत में कहा कि बीएनएम पूरी ताकत के साथ बलूचिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन की सच्चाई को दुनिया के सामने लाने के लिए सक्रिय है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मांग करता है कि बलूचिस्तान को एक ‘युद्धग्रस्त विवादित क्षेत्र’ घोषित करते हुए तत्काल हस्तक्षेप करे। बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की बहाली के बिना न केवल बलूच राष्ट्र का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि रणनीतिक रूप से इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में शांति की स्थापना भी बलूच राष्ट्र के आत्मनिर्णय के अधिकार और बलूचिस्तान की स्वतंत्रता पर निर्भर करती है।